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गुरुवार, 1 नवंबर 2012

मांग में सिंदूर क्यों ?










 मांग में सिंन्दूर भरना औरतों के लिए सुहागिन होने की निशानी माना


जाता है। विवाह के समय वर द्वारा वधू की मांग मे सिंदूर भरने के 


संस्कार को सुमंगली क्रिया कहते हैं।


 इसके बाद विवाहिता पति के जीवित रहने तक आजीवन अपनी मांग में 


सिन्दूर भरती है। हिंदू धर्म के अनुसार मांग में सिंदूर भरना सुहागिन 


होने का प्रतीक है। सिंदूर नारी श्रंगार का भी एक महत्तवपूर्ण अंग है। 


सिंदूर मंगल-सूचक भी होता है। शरीर विज्ञान में भी सिंदूर का महत्तव 


बताया गया है।


सिंदूर में पारा जैसी धातु अधिक होने के कारण चेहरे पर जल्दी झुर्रियां 


नहीं पडती। साथ ही इससे स्त्री के शरीर में स्थित विद्युतीय उत्तेजना 


नियंत्रित होती है। मांग में जहां सिंदूर भरा जाता है, वह स्थान ब्रारंध्र और 


अध्मि नामक मर्म के ठीक ऊपर होता है।


सिंदूर मर्म स्थान को बाहरी बुरे प्रभावों से भी बचाता है। सामुद्रिक शास्त्र 


में अभागिनी स्त्री के दोष निवारण के लिए मांग में सिंदूर भरने की 


सलाह दी गई है।

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