भगवानसे मुलाकात हो गयी ...
बड़ी अजीबसी एक बात कल हो गयी ,
मेरी भगवानसे मुलाकात हो गयी ...
वो खिड़कीमें बैठकर कांच के पार ताक रहे थे ,
ऊपर गगनकी खिड़कीसे झांक रहे थे .....
बहुत तनहा उनको महसूस हो रहा था ,
अधिकारी उनके आज गुम हो गये थे .....
भगवान् पर बहुतसे फोन आते है ,
एक नामसे उन्हें कोई नहीं पुकारता है ...
अब भगवानको भी अपना नाम याद करना पड़ता है ,
बहुत सोच सोच कर हेलो कहना पड़ता है ....
सबको इतना सब कुछ देकर आये है इस दुनियामें ,
पता नहीं ये मानव क्यों हर रोज नयी मांग पैदा करता है ???
संतुष्टि देना शायद भूल गये थे क्या ???
उन्होंने जांचा अपनी वहिखातेमें .....
मानव जब बंट रही थी संतुष्टि तब पेड़ काटने गया था !!!!
अपनी कबर खुद ही खोदने गया था ....
भगवानने फोन लाइन के सारे प्लग खुद ही निकाल दिए ....
अब वो खिड़कीमें बैठकर तमाशे देखनेमें मशगुल हो गए ......
अब तो सिर्फ दिलसे की गयी दुआ ही
उनके हॉट लाइन पर आती है ...
उनकी बिनती जो निस्वार्थ होगी उन्हें ही सुनी जाती है ...!!!!
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